लखनऊ (ब्यूरो)। कोई मरीज किसी मेडिकल स्टोर पर इस आस में जाता है कि वहां उसे उसके मर्ज की सही दवा मिलेगी। पर नकली दवा के कारोबारियों ने इस कदर मार्केट में अपना जाल बिछा रखा है कि आम मरीज असली व नकली दवा में अंतर ही नहीं कर पाता, जिसका खामियाजा उसे उठाना पड़ता है। राजधानी समेत प्रदेश में नकली दवाओं का कारोबार फैला हुआ है, जो नकली रैपर, बड़ी कंपनियों से मिलते-जुलते नाम या फिर अधिक डिस्काउंट के नाम पर बेची जा रही हैं। ये दवाएं हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, गाजियाबाद आदि से आती हैं। इसको लेकर डॉक्टर्स भी परेशान हैं क्योंकि मरीजों को दी जाने वाली दवाएं बीमारी पर कोई असर ही नहीं करती हैं।

8 हजार से अधिक दवा की दुकानें

राजधानी में दवा की करीब 8 हजार दुकानें हैं। इसमें 3 हजार होलसेल की और करीब 5 हजार रिटेल की दुकान हैं। राजधानी में हर माह दवाओं का बिजनेस करीब 300-350 करोड़ रुपये के आसपास का होता है। वहीं, दवा कारोबारियों के मुताबिक, नकली और डुप्लीकेट दवाओं की खपत लगातार बढ़ती जा रही है। जिसके कारण इनका मार्केट टर्नओवर करीब 10-15 पर्सेंट का हो गया है, जोकि चिंता का विषय है। नकली दवाएं लगातार पकड़ी जा रही हैं, पर इसके बावजूद इनपर कोई रोक नहीं लग पा रही है।

यहां से फैल रहा नकली दवाओं का मकड़जाल

दवा समिति के पदाधिकारियों के मुताबिक, पहले नकली व डुप्लीकेट दवाएं हिमाचल प्रदेश से आती थीं, पर बाद में जो दवाएं पकड़ी गईं वो राजस्थान, मेरठ व गाजियाबाद आदि जगह से आई थीं। चूंकि लखनऊ कोई प्रोडक्शन क्षेत्र नहीं है इसलिए यहां पर ऐसी दवाओं का बड़ी संख्या में खपाया जाता है, जोकि चिंता का विषय है। क्योंकि इससे असल दवा कारोबार पर भी असर पड़ रहा है।

अधिक छूट का देते हैं लालच

राजधानी में नकली और डुप्लीकेट दवाओं को खपाने के लिए एजेंसीज कई तरह से मकड़जाल फैलाती हैं। नकली व डुप्लीकेट दवाएं असल के मुकाबले अधिक सस्ती होती हैं। साथ ही इनपर अन्य दवाओं के मुकाबले अधिक डिस्काउंट करीब 15-20 पर्सेंट तक दिया जाता है। लोग सस्ती दवा के चक्कर में इन्हें खरीदकर खा लेते हैं। जिसके कारण उनका और दवा कारोबारियों दोनों का नुकसान हो रहा है। वहीं, ऑनलाइन दवा मंगवाने में भी बड़ा खेल होता है।

मिलीभगत से फलफूल रहा धंधा

वैसे तो सरकार ने असली और नकली दवाओं में अंतर के लिए कई कदम उठाये हैं। पर नकली दवा का धंधा करने वाले जालसाज अधिकारियों के साथ मिलीभगत करते हुए फर्जी बिल बनाकर उसे अधिकारियों को दिखा देते हैं। जिसकी वजह से कई बार नकली दवाओं की खेप असली दवाओं के साथ मिलाकर भेज दी जाती है, जो रीटेल मेडिसिन काउंटर पर बेच दी जाती है।

लगातार चल रहा अभियान

नकली दवाओं के खिलाफ अधिकारी भी लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। एसटीएफ और एफएसडीए मिलकर नकली दवा का कारोबार करने वालों पर शिकंजा कस रहे हैं। लखनऊ में 2021 में मेडिसिन मार्केट में करीब 2 करोड़ की नकली दवाएं पकड़ी जा चुकी हैं। इसके अलावा प्रदेश के अन्य शहरों जैसे आगरा व वाराणसी आदि में भी नकली दवाएं पकड़ी जा रही हैं। फरवरी-24 में कार्यवाही करते हुए एफएसडीए द्वारा कुल 92 औषधि विक्रय प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित किए जा चुके हैं। हालांकि, इसके बावजूद नकली दवा का धंधा फलफूल रहा है।

दवा के साइड इफेक्ट

डॉक्टर्स के अनुसार, नकली और डुप्लीकेट दवाओं का शरीर पर बुरा असर पड़ता है। एक तो बीमारी ठीक नहीं होती है, दूसरा शरीर के महत्वपूर्ण अंगों जैसे दिल, लिवर व किडनी आदि पर बुरा असर भी पड़ता है। जिसके कारण मर्ज और बढ़ जाता है। ऐेसे में लोगों को केवल जान-पहचान वाली दवा दुकानों से ही दवाएं खरीदनी चाहिए।