लखनऊ (ब्यूरो)। पावर कारपोरेशन की ओर से बिजली उपभोक्ताओं की बिलिंग व अन्य शिकायतों के निस्तारण के लिए इन्हें ऑनलाइन माध्यम से दर्ज कराए जाने की सुविधा दी गई है, लेकिन उपभोक्ता परिषद की ओर से जो खुलासा किया गया है, उससे साफ है कि तीन महीने से लेकर एक साल तक डिस्कॉम वाइज ऐसी हजारों शिकायतें हैैं, जिनका निस्तारण नहीं किया गया है। सभी डिस्कॉम मिलाकर तीन माह से लेकर एक साल के बीच करीब 65 हजार शिकायतें आई हैैं, जिनमें से सिर्फ 31 हजार का ही निस्तारण किया गया है। उपभोक्ता परिषद की ओर से व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उपभोक्ताओं को मुआवजा दिए जाने की मांग की गई है।

दिसंबर 23 तक दर्ज हुईं 65,818 शिकायतें

बिजली कंपनियों में बिलिंग संबंधी शिकायतें पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर आती हैैं और उसका समाधान ससमय न किए जाने से उपभोक्ता परेशान रहते हैं। उपभोक्ता परिषद ने गुरुवार को जो खुलासा किया है, वह बेहद चौंकाने वाला है। बिजली कंपनियों ने एक जुलाई 2022 में पावर कॉरपोरेशन की वेबसाइट पर ऑनलाइन बिल संशोधन संबंधी शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था शुरू की थी, तब से लेकर दिसंबर 2023 तक प्रदेश में सभी बिजली कंपनियां से कुल लगभग 65,818 बिलिंग संबंधी शिकायतें उपभोक्ताओं द्वारा ऑनलाइन पावर कॉरपोरेशन की वेबसाइट पर दर्ज कराई गईं। जिसमें से केवल 34 हजार 734 यानि लगभग 52 प्रतिशत शिकायतों का निस्तारण ही किया गया और आज भी 31,084 बिलिंग संबंधी शिकायतें कंपनियों के दफ्तरों में विचाराधीन हैं, जो सिद्ध करता है कि बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों पर बिजली कंपनियां गंभीर नहीं है। विद्युत नियामक आयोग द्वारा समय से बिलिंग संबंधी शिकायत को ना दूर करने पर 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मुआवजा भी है, लेकिन बिजली कंपनियां मुआवजा क्या देगी, वे तो उपभोक्ताओं की समस्याएं ही नहीं सुन रही हैं।

शिकायतें एक नजर में

डिस्काम टोटल बिलिंग शिकायत निस्तारण लंबित

पूर्वांचल 20,652 9,365 11,287

मध्यांचल 22,174 11,897 10,277

दक्षिणांचल 8,091 2,703 5,388

पश्चिमांचल 14,901 10,769 4,132

टोटल 65,818 34,734 31,084

2,225 शिकायतें एक साल से ज्यादा लंबित

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि इन शिकायतों में लगभग 2,225 शिकायतें एक साल से ज्यादा व्यतीत हो जाने के बाद भी उनका निस्तारण नहीं किया गया। 3,800 शिकायतें ऐसी हैं जो 180 से लेकर 365 दिनों से लंबित हैं। ऐसे में बिजली कंपनियों को सोचना होगा कि कैसे उपभोक्ताओं की सभी शिकायतें समयबद्ध तरीके से निस्तारित हों। बिजली कंपनियां खुद देखें कि हजारों की संख्या में उपभोक्ताओं की शिकायतें लंबित हैं, जबकि बिलिंग संबंधी शिकायतों को सात दिन में विद्युत वितरण संहिता के तहत दूर किया जाना चाहिए।