सावधान रहें, आप टारगेट पर हैं

अब हर हाथ में मोबाइल है और अधिकांश में इंटरनेट भी यूज हो रहा है। इंटरनेट देश में कम्यूनिकेशन की सबसे बड़ी कड़ी बन रहा है.  जहां ट्राई की रिपोर्ट देश में मोबाइल यूजर्स बढऩे के दावे कर रही है, वहीं लगातार बढ़ते आंकड़ों के साथ देश में साइबर क्राइम के मामलों में भी तेजी से बढ़ रहे हैं। आसमान तक फैली इंटरनेट की दुनिया का एक बड़ा स्याह सच भी है। रिपोर्ट पर गौर करें तो मात्र चार साल में ही नौ गुणा तेजी से साइबर क्राइम के मामलों में बढ़ोत्तरी हुई है। उधर, साइबर क्राइम का सामना करने में पुलिस का पसीना छूट रहा है।

बढ़ रहा साइबर क्राइम

इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन इंडिया के आंकड़ों में ये सामने आया है कि 2008 से 2012 के बीच साइबर क्राइम की घटनाओं में नौ फीसदी से ज्यादा का इजाफा हो गया है। 2008 में जहां एक साल में साइबर क्राइम का आंकड़ा 2565 था, वहीं 2012 में ये आंकड़ा बढ़कर 22060 तक पहुंच गया है। ऐसे में अगर पुलिस ने साइबर क्राइम को ऐसे ही गंभीरता से नहीं लिया तो ये आंकड़े कुछ ही सालों में 50 हजार से तक पहुंच सकते हैं।

कितने मोबाइल यूजर्स

ट्राई के आंकड़ों के मुताबिक 2013 तक देश में 875 मिलियन यूजर्स थे। जो अब और अधिक हो गए हैं। यानि हमारे देश में जहां 1.21 बिलियन जनसंख्या है, उसमें से मात्र 875 मिलियन ही मोबाइल यूजर्स हैं।

मोबाइल इंटरनेट यूजर्स

चौकाने वाली बात ये है कि साल 2013 तक मोबाइल इंटरनेट यूजर्स की भी संख्या काफी अधिक बढ़ गई है। जो 110 मिलियन है। ऐसे में आज के समय में अधिकतर लोग इंटरनेट यूज मोबाइल में कर रहे हैं। जबकि इंटरनेट यूजर्स की संख्या 2013 तक 205 मिलियन हो गई है। जैसे मोबाइल फीचर्स आ रहे हैं उससे उम्मीद है कि साल 2014 के अंत तक मोबाइल इंटरनेट यूजर्स की संख्या में दुगना इजाफा हो जाएगा।

चौकाने वाले आंकड़े

खास बात ये है कि अब गांवों तक में इंटरनेट की पहुंच हो गई है। 2013 के अंत तक गांवों में 68 मिलियन लोग इंटरनेट यूज कर रहे हैं। जबकि शहर में इंटरनेट यूज करने वालों की संख्या 137 मिलियन। चौकाने वाला तथ्य तो ये है कि शहरी और गांवों के यूजर्स में अब ज्यादा फर्क नहीं रह गया।

पुलिस है नाकाम

अक्सर साइबर क्राइम की घटनाओं को खोलने में पुलिस असफल ही हो रही है, अगर पुलिस ये घटनाएं खोलती भी है तो उन्हें काफी समय लग जाता है। खास बात ये भी है कि पुलिस के पास अपने इतने साइबर क्राइम को ऑपरेट करने वाले आफिसर्स भी नहीं है। ऐसे में अधिकतर प्रदेशों की पुलिस को प्राइवेट लोगों की सहायता लेनी पड़ रही है।

बड़े बड़े साइबर क्राइम

अकाउंट हैकिंग, इललीगल मनी ट्रांसफर, आईडी ब्लॉक्ड, आईपी एडे्रस हैकिंग, इंटरनेट पर धमकी, ब्लू फिल्म वाचिंग, सोशल नेटनवर्किंग साइटस पर धमकियां

मोइबल एप्स और भी खतरनाक

मुजफ्फरनगर कांड में एक वीडियो तेजी मोबाइल में तेजी से फैल रहा था। इस वीडियो के इतना तेज फैलने की एक वजह मोबाइल एप वाटस एप भी थी। इस एप पर ये वीडियो धड़ाधड़ पोस्ट किया जा रहा था, जबकि  प्रदेश पुलिस इस मामले को खोल पाने में और शेयरिंग रोक पाने में भी नाकाम रही थी।