- दैनिक जागरण आईनेक्स्ट टीम ने वेडनसडे को पब्लिक यूटिलिटी से जुड़े डिपार्टमेंट का किया रियलिटी चेक

- अधिकतर ऑफिसेस में 10.40 तक भी नहीं पहुंचे कार्मिक

देहरादून, पहाड़ों में बर्फबारी का असर दून में दिख रहा है। सर्द हवाओं के साथ लगातार टेंप्रेचर लुढ़क रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर सरकारी डिपार्टमेंट्स में दिख रहा है। फरियादी सुबह ही अपने कार्यो के लिए सरकारी दफ्तरों में पहुंच रहे हैं, लेकिन अधिकारी व कर्मचारी टाइम पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। कई कर्मचारी तो ऑफिस के निर्धारित समय से एक से डेढ़ घंटे तक लेट पहुंच रहे हैं। दैनिक जागरण आईनेक्स्ट की टीम ने वेडनसडे को एक साथ कई सरकारी ऑफिसों तक पहुंचने की कोशिश की। इस रियलिटी चेक यह सच्चाई सामने आई। इन ऑफिसों में 60 परसेंट से ज्यादा कार्मिक सुबह अपनी कुर्सी पर नजर नहीं आए। सबसे दिलचस्प बात ये रही कि अधिकारियों में एकाध भी नजर नहीं आए।

सीन-1

स्थान- विकास भवन।

वक्त-सुबह 10.08 बजे।

ऑफिस-पशुपालन विभाग, मुख्य प्रसार अधिकारी।

स्थिति-ऑफिस खुला था, लेकिन अधिकारी कुर्सी पर मौजूद नहीं।

सीन-2

स्थान-विकास भवन।

वक्त-सुबह 10.12 बजे।

ऑफिस -क्रीड़ा कक्ष, युवा कल्याण एवं प्रारद देहरादून।

स्थिति-यहां भी कार्मिकों की सारी खुशियां खाली।

सीन-3-

स्थान-विकास भवन।

वक्त- सुबह 10.16 बजे।

ऑफिस-जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी।

स्थिति-यहां भी जिले के अधिकारी की कुर्सी खाली दिखी।

सीन-4

स्थान-विकास भवन।

वक्त -सुबह 10.22 बजे।

ऑफिस-डिप्टी चीफ वेटनरी ऑफिसर।

स्थिति-यहां तो अधिकारी के ऑफिस का दरवाजा ही नहीं खुल पाया था।

सीन-5

स्थान-विकास भवन।

वक्त सुबह-10.24 बजे।

ऑफिस-जिला युवा कल्याण अधिकारी।

स्थिति-यहां ऑफिस खुला था, लेकिन अधिकारी नदारद थे।

सीन-6

स्थान-विकास भवन।

वक्त 10.26 बजे

ऑफिस-प्रशासनिक अनुभाग व एकाउंटेंट।

स्थिति-दोनों डिपार्टमेंट में एक भी कर्मचारी सीट पर नहीं दिखे।

जिम्मेदार अधिकारी भी गायब

वेडनसडे सुबह 10 से लेकर 10.45 मिनट तक ये विकास भवन की असल तस्वीर थी। हमारी टीम ने एक के बाद एक-एक ऑफिस का मुआयना किया। जहां 60 परसेंट से अधिक कार्मिक अपनी सीटों पर नजर नहीं आए। हो सकता है कि कुछ कार्मिक सरकारी कार्यो के लिए गए हों, कुछ मीटिंग्स में हों, कुछ ऑफिस कैंपस में हों और कुछ लीव पर हों। खास बात ये रही कि विकासभवन के जिम्मेदार अधिकारी भी अपनी सीट पर नहीं दिखे। इसमें खुद सीडीओ, जिला विकास अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी आदि अधिकारी भी शामिल हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि अपने कार्यो के लिए इन दफ्तरों में पहुंचने वाले फरियादियों को कार्मिकों का कितना इंतजार करना पड़ता होगा।