बहुत नाइंसाफी हैशिक्षकों का यह रेश्यो

2018-12-02T06:00:41Z

- एक स्कूल में 176 स्टूडेंट्स पर मात्र 1 टीचर

- दूसरे स्कूल में मात्र 65 स्टूडेंट्स पर 4 टीचर

बरेली : शहर में दो ऐसे बेसिक स्कूल हैं, जो देखने में लगभग एक जैसे हैं। लेकिन, कुछ ऐसा है जो दोनों के बीच जमीन आसमान का फर्क पैदा कर देता है। चौंकाता है। झकझोरता है। व्यवस्था को कोसता है। दरअसल एक स्कूल में में 176 स्टूडेंट्स पर सिर्फ एक टीचर है और दूसरे में 65 स्टूडेंट्स पर 4 टीचर।

हम बात कर रहे हैं कटघर प्राथामिक विद्यालय और पूर्व माध्यमिक विद्यालय किशोर बाजार की। दैनिक जागरण आईनेक्स्ट ने दोनों स्कूलों में विजिट किया तो सच सामने आया। कटघर प्राथमिक विद्यालय में क्लास-1 से क्लास-5 तक 176 स्टूडेंट्स पर मात्र एक सहायक अध्यापिका शहनाज बानो हैं। शहनाज को स्टूडेंट्स को शिक्षा देने के साथ ऑफिस का वर्क भी देखना पड़ता है। साथ ही इनके पास प्रधान अध्यापिका का कार्यभार भी है। कुल मिलाकर शहनाज बानो के जिम्मे स्कूल के सभी कार्य हैं।

रोज तीन बजे उठती हैं शहनाज

शहनाज बानो ने बताया कि उनके अपना कोई बच्चा नहीं है। बच्चों को पढ़ना और उनकी जरूरतों को ध्यान रखना उन्हें अच्छा लगता है। उनकी कोशिश होती है कि वे रोज हर क्लास को समय दे पाएं। वह रोज सुबह 3 बजे उठती है और नमाज अदा कर घर के सभी कामकाज निपटाती है। फिर सुबह करीब 8:45 तक स्कूल पहुंच जाती हैं। बच्चों को पढ़ाने में शहनाज के पति इरफान और स्कूल की प्यून आकांक्षा भी मदद करती है। आकांक्षा खुद बीएड है और इरफान हकीम। क्लास-4 और क्लास-5 को शहनाज एक साथ बैठाकर पढ़ाती है और बाकी क्लासेज की जिम्मेदारी इरफान और आकांक्षा उठाती हैं।

पत्नी की मदद के लिए अपना काम छोड़ा

हकीमी से रोज 800 से हजार रुपए रुपए कमाने वाले इरफान अली ने बताया कि बच्चों के भविष्य के लिए जब कोई आगे नहीं आया तो उन्हाेंने अपना काम छोड़कर स्कूल के कामकाज में पत्‍‌नी का हाथ बंटाने लगे। बच्चों को पढ़ाना भी शुरू कर दिया। इरफान ने बताया कि शहनाज की तबियत ठीक नहीं रहती है। इसके बावजूद वह पूरे स्कूल के कामकाज को अकेली संभालती थी। ऐसे में उन्हें ही उनका और बच्चों का साथ देने के लिए आगे आना पड़ा।

बीएड पास प्यून भी लेती है क्लास

स्कूल में प्यून अकांक्षा ने बताया कि पिता के देहांत के बाद उनकी जगह 2017 में उसे नौकरी मिली थी। जुलाई 2018 में उसे इस स्कूल से अटैच कर दिया गया। बीकॉम, बीएड की डिग्रीधारी और टेट क्वालीफाई कर चुकी अकांक्षा ने बताया कि मैडम के लिए एक साथ सभी क्लासेज को संभालने में दिक्कत आती थी, इसलिए वह उनकी मदद करने लगी।

-----------------

इसमें हमारा क्या दोष

वहीं, दूसरी ओर पूर्व माध्यमिक विद्यालय किशोर बाजार में तीन क्लासेज छठी, सातवीं और आठवीं में 65 स्टूडेंट्स को पढ़ाने के लिए यहां पर 4 टीचर्स की तैनाती की गई है। इनमें एक हेड मास्टर और तीन सहायक अध्यापिका हैं। इस बारे में पूछने पर टीचर्स का कहना है कि स्कूल में बच्चे कम होने में उनका कोई दोष नहीं है। उनका काम पढ़ाना है और वे आना काम कर रहे हैं।


This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy  and  Cookie Policy.