ये मकान नहीं हादसे की दुकान

2019-07-18T06:00:42Z

- बनारस के कभी भी हो सकता है मुंबई के डोंगरी जैसा हादसा

शहर में मौजूद हैं 350 जर्जर मकान

- नगर निगम नहीं कर पा रहा ध्वस्तीकरण, कहीं विवाद तो कुछ घरों पर है स्टे

सीन-वन

दालमंडी स्थित संगमरमर मस्जिद के बगल में अब्दुल अनीस का दो मंजिला जर्जर मकान है। मुख्य रोड पर स्थित जर्जर मकान को गिराने के लिए नगर निगम ने रिपोर्ट लगा दी है लेकिन अभी तक मकान ध्वस्त नहीं कराया गया है। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

सीन-टू

मुकीमगंज इलाके में दो मंजिला मकान जर्जर हाल में खड़ा है। बारिश में ईटें बिखरकर तंग गली में गिरती हैं। इनकी चपेट में आने से कई जानवर चोटिल भी हो चुके है, नगर निगम ने इन्हें जर्जर मकानों में चिह्नित किया है। मगर, मकान ध्वस्त नहीं हुआ।

सीन-थ्री

चौकाघाट पानी टंकी स्थित दो मंजिला मकान अब गिरा तब गिरा वाली स्थिति में है। बारिश में छत के चप्पड़ ईटे आदि नीचे गलियों में गिरती हैं। हाल यह है कि बारिश के समय डर की वजह से लोग इधर से गुजरते नहीं है। निगम की रिपोर्ट में यह ध्वस्तीकरण के जद में है।

सीन-फोर

प्रह्लाद घाट में वैसे तो कई मकान जर्जर है, जिनके मलबे आए दिन गिरते रहते हैं। एक व्यापारी का मकान है, जो कभी भी जमींदोज हो सकता है। पड़ोसी हमेशा संशकित रहते है। नगर निगम की इंजीनियरिंग टीम जांच पड़ताल कर गई, लेकिन अभी तक मकान ध्वस्त नहंी हुआ।

यह तो सिर्फ शहर के सिर्फ चार जर्जर मकानों की हालत है। ऐसे कुल साढ़े तीन सौ मकान हैं जो शहरवासियों के लिए खतरा हैं। हल्की बारिश में इनकी ईटें बिखरने लगती हैं। पटिया-गार्डर खिसकता है मजबूर कुछ लोग इनके नीचे जीवन-यापन कर रहे हैं। नगर निगम ने जर्जर मकानों को नोटिस तो जारी किया है लेकिन वो गिरे या नहीं यह देखने की जरूरत नहीं समझा। मकान को ध्वस्त भी नहीं किया गया या नहीं। कुछ कानूनी पचड़े में फंसे हुए हैं तो कुछ किराएदार खाली करने के मूड में नहीं है। यदि इन मकानों को ध्वस्त नहीं किया गया तो कभी भी बनारस में मुम्बई के डोंगरी जैसी भयानक घटना हो सकती है। निगम भी मानता है कि मकान ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया में लेट हो रहा है लेकिन जल्द ही अभियान चलाकर ऐसे जर्जर मकान जमींदोज किए जाएंगे।

ढहा चुके हैं 30 मकान

नगर निगम के दस्तावेज पर गौर करें

तो शहर में करीब 350 मकान जर्जर हैं, जो कभी भी ढह सकते हैं। जर्जर मकान की दुश्मन बारिश इन पर कहर बरपा रही है। सप्ताह भर पहले शहर में जोरदार बारिश हुई थे, इसमें दो मकान ढह गये थे। हालांकि इन मकानों को गिराने के लिए निगम की ओर से कवायद भी शुरू हुई थी, लेकिन किरायेदारी विवाद और कोर्ट से स्टे होने के कारण आगे नहीं बढ़ पायी। निगम के अधिकारी ने बताया कि विश्वनाथ कॉरीडोर के लिए अधिग्रहित मकानों में 30 से अधिक जर्जर स्थिति में थे, जो ढहा दिये गये हैं।

दो साल से पड़ा है ठंडा

जर्जर मकानों को लेकर नगर निगम प्रशासन ने दो साल से कुछ नहीं कराया। न तो भवनों का सत्यापन किया गया और न ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हुई। इससे साफ लगता है कि निगम को किसी बड़े हादसे का इंतजार है। 12 जुलाई को चौक व चेतगंज में दो मकान गिरने के कारण नगर आयुक्त ने शहर में जर्जर भवनों के सत्यापन का आदेश दिया है।

कोतवाली जोन में सबसे ज्यादा जर्जर

नगर निगम के दस्तावेज में जर्जर मकानों के जो आंकड़े हैं, उसमें

सबसे अधिक कोतवाली जोन में है। कोतवाली में करीब 120 मकान जर्जर हैं। इनमें कुछ ऐसे हैं, जो गिरने की कगार पर हैं, लेकिन उन्हें बांस-बल्ली लगाकर रोका गया है। इसके बावजूद इनका कोई न कोई हिस्सा गिरता रहता है। कभी तेज हवा और बरसात मकानों को जर्जर हिस्सों को ढहाते रहते हैं।

पूर्व में कई मकान मालिकों को नोटिस जारी की गई थी, लेकिन अदालती अड़चन से कार्रवाई रुकी है। एक बार फिर जर्जर भवनों का सत्यापन शुरू हो गया है। रिपोर्ट आने के बाद फिर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।

अजय सिंह, अपर नगर आयुक्त

जोन वार जर्जर मकान

120

कोतवाली

90

दशाश्वमेध

55

आदमपुर

45

भेलूपुर

35

वरुणापार


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