नोबेल पुरुस्‍कार से नवाजा जाना किसी भी व्‍यक्ति के लिए जीवनभर की उपलब्धि होती है. लेकिन साल 1962 में नोबेल पुरुस्‍कार पाने वाले वैज्ञानिक जेम्‍स वॉटसन ने अपने नोबेल पुरुस्‍कार को 30 करोड़ रुपये में बेच दिया है. वॉटसन को डीएनए स्‍ट्रक्‍चर खोजने के लिए नोबेल पुरुस्‍कार से सम्‍मानित किया गया था.


वॉटसन ने बेच दिया नोबेल
डीएनए के स्ट्रक्चर को दुनिया के सामने लाने वाले वैज्ञानिक जेम्स वॉटसन ने अपना नोबेल पुरुस्कार बेच दिया है. दरअसल वैज्ञानिक जेम्स वॉटसन को अपनी डीएनए से जुड़ी खोज के लिए साल 1962 के नोबेल पुरुस्कार से सम्मानित किया गया था. लेकिन वॉटसन ने अपने अवॉर्ड को 4.7 मिलियन डॉलर्स में बेच दिया है. यह नीलामी फोन पर लगाई गई बोली के द्वारा किया गया. उल्लेखनीय है कि यह पहली बार हुआ है जब किसी नोबेल विजेता ने अपना अवार्ड बेचा है. इसके साथ ही वॉटसन के अवॉर्ड की नीलामी राशि उनके पूर्व सहयोगी फ्रेंसिस क्रिक के नोबेल मेडल की नीलामी राशि को क्रॉस कर लिया है. क्रिक के मेडल की बोली 2.2 मिलियन डॉलर लगी थी. वॉटसन के नोबेल मेडल की नीलामी में उनकी पांडुलिपिया भी नीलाम हुई हैं. इनकी नीलामी राशि 61000 डॉलर लगी. गौरलतलब है कि फ्रैंसिस क्रिक, जेम्स वॉटसन, और मॉरीज विल्किंस को सयुंक्त रूप से मॉलिक्युलर स्ट्रक्चर खोजने के लिए नोबेल से सम्मानित किया था. अफ्रीकी समुदाय पर की आपत्तिजनक टिप्पणी


डीएनए स्ट्रक्चर खोजने वाले जेम्स वॉटसन को अफ्रीकी समुदाय के ऊपर आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए भी जाना जाता है. दरअसल वॉटसन ने कहा था, 'हमारी सभी सामाजिक नीतियां इस आधार पर बनी हैं कि उनकी इंटेलिजेंस का स्तर हमारे जितना है. मगर सभी टेस्ट बताते हैं कि ऐसा नहीं है.' इसके बाद वैज्ञानिक समुदाय ने वॉटसन से किनारा कर लिया था. इसके बाद वॉटसन ने अपने स्टेंड को सुधारते हुए कहा, 'जिन लोगों को मेरी टिप्पणी से लगा हो कि अफ्रीका महाद्वीप जेनेटिकली कमतर है तो मैं बिना शर्त माफी मांगता हूं. मेरा मतलब यह नहीं था. ऐसा मानने का कोई वैज्ञानिक आधार भी नहीं है.'

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Posted By: Prabha Punj Mishra