सुनने में आ रहा है कि नौ महीने बाद ऑटोमोबाइल कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी करने को तैयार हैं. उनका कहना है कि इनपुट कास्‍ट बढ़ने और ऊंचे लॉजिस्टिक्स चार्जेज की वजह से ऐसा करना जरूरी हो गया है. वहीं कंपनियों का यह भी कहना है कि वे डिमांड को ध्‍यान में रखकर ही कदम उठाएंगी.

ग्राहकों की डिमांड को ध्यान में रखकर उठाएंगे कदम
ह्युंडई मोटर इंडिया ने इसको लेकर कहा है कि वह अगले कुछ दिनों में कीमतें बढ़ा देगी. मारुति सुजुकी और बीएमडब्ल्यू जैसी अन्य कंपनियां संभावित ग्राहकों पर कम से कम असर डालने वाली बढोतरी पर विचार कर रही हैं. ऐसा इसलिए है ताकि कंपनी से जुड़े विश्वसनीय ग्राहकों की डिमांड पर असर न पड़े और अच्छे स्तर पर सेल पहले की ही तरह बरकरार रहे.
और किसने बढ़ाए है दाम  
ये बात और है कि कुछ कंपनियों ने पहले ही दाम बढ़ा दिए हैं. टू ब्हीलर सेगमेंट की मार्केट लीडर हीरो मोटोकॉर्प ने कास्ट बढ़ने की वजह से पिछले महीने बाइक और स्कूटर की कीमतों में 600 रुपये तक की बढ़ोतरी की थी. इनके साथ ही होंडा मोटरसाइकिल और स्कूटर इंडिया ने भी कीमतें बढ़ाई हैं. अन्य टू-व्हीलर कंपनियां भी जल्द से जल्द इस दिशा में कदम उठाने के मूड में दिख रही हैं.  
अब जाकर कंपनी ने बनाई है गुंजाइश
दो साल तक सेल्स में गिरावट के बाद सरकार ने मांग बढ़ाने और इंडस्ट्री को पटरी पर लाने के मकसद से फरवरी में व्हीकल्स पर एक्साइज ड्यूटी 4 से 6 प्रतिशत घटाई थी. इसके बाद से ऑटोमोबाइल कंपनियों ने कीमतें नहीं बढ़ाई हैं. अब कंपनियों का कहना है कि उनके पास दाम बढ़ाने के लिए कुछ गुंजाइश बनी है. इससे वे नई कारों पर बड़े इनवेस्टमेंट की रिकवरी के साथ ही प्रॉफिटेबिलिटी में भी सुधार कर सकेंगी.
क्या कहना है ह्युंडई मोटर के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट का
ह्युंडई मोटर के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, मार्केटिंग एंड सेल्स राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि वह अब दबाव महसूस कर रहे हैं, क्योंकि पिछले कई महीनों से दाम नहीं बढ़ाए गए हैं. वहीं डिस्काउंट पीक पर हैं. उन्होंने इस साल नई कारें भी लॉन्च की हैं और इसमें बड़ा इनवेस्टमेंट भी किया गया है, जिसे रिकवर करने की जरूरत है. उधर, कंपनियों का कहना है कि स्टील जैसे इनपुट की कॉस्ट महंगी होने की वजह से उन्हें कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. ह्युंडई मोटर, मारुति सुजुकी और होंडा कार जैसी ज्यादातर कंपनियां ऑटो-ग्रेड स्टील का दक्षिण कोरिया और जापान जैसे इंटरनेशनल मार्केट्स से इंपोर्ट करती हैं.
कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ रहा है असर  
ऊंचे डिस्काउंट और मुफ्त उपहारों के कारण भी ऑटोमोबाइल कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर असर पड़ रहा है. जुलाई और सितंबर के दौरान डोमेस्टिक मार्केट में हर कार पर 21,000 रुपये का डिस्काउंट देने से मारुति सुजुकी का प्रॉफिट मार्जिन 20 बीपीएस पर आकर गिरा है. आईएचएस ऑटोमोटिव के प्रिंसिपल एनालिस्ट (ऑटोमोबाइल) अमित कौशिक ने कहा कि मजबूत प्रॉफिट मार्जिन बरकरार रखने के लिए अच्छी स्ट्रैटेजी की जरूरत होती है. मौजूदा प्राइस हाइक मार्जिन बरकरार रखने और मुनाफा बढ़ाने की कोशिश है. हाल के समय में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए स्थितियां सुधरने के बावजूद फंडामेंटल्स मुश्किल हैं. वहीं ऑटोमोबाइल कंपनियों की नजर अब एक्साइज ड्यूटी बेनेफिट पर सरकार के रवैये पर टिकी हुई है. ये बेनेफिट दिसंबर में समाप्त हो रहे हैं.

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Posted By: Ruchi D Sharma