तेजी से बदल रहा है आईआईटी कानपुर

2019-11-10T06:00:48Z

- आईआईटी कानपुर 1969 बैच की री यूनियन में एल्युमिनाइज ने पुरानी यादें ताजा कीं

KANPUR: आईआईटी कानपुर तेजी से बदल रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में जबरदस्त बदलाव आ गया है। 50 साल पहले की बात करें तो उस दौरान कई बार रात में रावतपुर से पैदल कैंपस आना पड़ता था। कभी कभी तो फैकल्टी की साइकिल मांग कर ले जाते थे। 1969 बैच की री यूनियन के कोऑर्डिनेटर दिलीप विलियम ने मीडिया इंट्रैक्शन के दौरान स्टूडेंट लाइफ की यादें ताजा करते हुए ये बातें बताई।

बाटा के पहले इंजीनियर

आईआईटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री लेने वाले लखनऊ निवसी दिलीप विलियम ने बताया कि वह शू कंपनी बाटा के पहले इंजीनियर हैं। यही नहीं इंडिया में प्लास्टिक की बोतल उन्होंने ही इंट्रोड्यूस की थी। देहरादून के रहने वाले कमल किशोर शर्मा ने आईआईटी से केमिकल इंजीनियरिंग में डिग्री लेकर लंदन की एक कंपनी में जॉब की। वहां पर पांच साल रहने के बाद दिल नहीं लगा तो इंडिया वापस आ गए। वह इस वक्त वह ल्यूपिन फार्मा कंपनी में वाइस प्रेसीडेंट हैं।

मैटीरियल डेवलप करके लॉ की प्रैक्टिस

लखनऊ के रहने वाले कल्पेश कुमार ने मैटीरियल साइंस में बीटेक के बाद कैम्ब्रिज से पीएचडी पूरी की। इसके बाद उन्होंने ड्रेयर लैबोटरी में जॉब शुरू की। कल्पेश ने 19 मैटीरियल डेवलप कर उनका पेटेंट भी हासिल किया। इस बीच बोस्टन के न्यू इंग्लैंड स्कूल से लॉ की डिग्री हासिल करने के बाद अब लॉ की प्रैक्टिस कर रहे हैं।

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नेपाल के संविधान की ड्रॉफ्टिंग कराई

काठमांडू के रहने वाले बिजनेसमैन पद्मज्योति ने आईआईटी कानपुर से मैकेनिकल में बीटेक की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद कोलकाता में जॉब की। वह नेपाल व इंडिया के ट्रेडिंग कारोबार को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा चुके हैं। पूर्व पीएम नरसिंहा राव व नेपाल के पूर्व पीएम देऊबा को एक मंच पर लाकर बिजेनस का जो रोडमैप तैयार किया गया था, उसका श्रेय पद्मज्योति को जाता है। पद्म नेपाल के नए संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी के मेंबर थे।

Posted By: Inextlive

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