इस शुक्रवार को बॉक्‍स ऑफ‍िस पर एक और थ्रिलर मूवी ने दस्‍तक दे ही दी. मूवी का नाम है 'खामोशियां'. छोटे पर्दे से उठे दो टीवी स्‍टार्स ने अली फजल की इस फ‍िल्‍म से बॉलीवुड में कदम रखा. पहले हैं एक्‍टर गुरमीत चौधरी और दूसरी हैं एक्‍ट्रेस सपना पब्‍बी. बात करें निर्देशक करन दार्रा करन फ‍िल्‍म की तो इसकी कहानी तीन युवाओं के इर्द-गिर्द घूमती है.

कहां से शुरू होती है फ‍िल्‍म की कहानी  
इनमें से अली फजल ने भूमिका निभाई है एक हैं लेखक की. अली की लिखी किताब हिट हो जाती है. उसे ‘वन बुक वंडर’ कहा जा रहा है. इसी असफलता के बाद उसका प्यार उससे दूर हो जाता है. अब वह जिंदगी के उद्देश्य को पाने में और अपने प्यार से किये वादे को पूरा करने में पूरी तरह से नाकाम रहता है. इसके बाद वो अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए एक यात्रा पर निकलता है. यहां उसकी मुलाकात सपना पब्बी से होती है. सपना एक गेस्ट हाउस चलाती है. गेस्‍ट हाउस का मालिक है फ‍िल्‍म में उसके पति बने गुरमीत चौधरी.
Khamoshiyan
A; Horror
Director: Karan Darra
Cast: Ali Fazal, Sapna Pabbi, Gurmeet Choudhary


कई उलझनों के बीच चलती है फ‍िल्‍म की कहानी  
फ‍िल्‍म में गुरमीत कभी बेहद अमीर और पेपर मिल के मालिक हुआ करते थे, लेकिन अब उसकी तबीयत ठीक नहीं है और जबरदस्ती सपना से वो गेस्टहाउस चलवा रहे हैं. अब इस गेस्ट हाउस में रहने के दौरान अली के साथ कुछ अजीब घटनाएं होती हैं. इसके बाद वो उस घर और सपना की जिंदगी से जुड़ी सच्चाई को जानने में जुट जाता है. अली जितना सपना से इस बारे में बात करता है उतना ही उसकी ओर खिंचता चला जाता है. इसके बाद वो कन्फ्यूज है कि ये घटनाएं वास्तविक हैं या उसका भ्रम हैं. इन्‍हीं उलझनों के बीच चलती है फ‍िल्‍म की पूरी कहानी.
फ‍िल्‍म में क्‍या है अच्‍छा और क्‍या है बुरा  
पहले हाफ में फ‍िल्‍म रहस्‍यों के साथ टेंशन को क्रियेट जरूर करती है, लेकिन वहीं सेंकेंड हाफ में इस बात को गहराई के साथ सोचने पर मजबूर कर देती है कि फर्स्‍ट हाफ में क्‍या देखा था. फ‍िल्‍म के डायरेक्‍शन में कुछ कमियां जरूर दिखीं हैं. जैसा कि पहले ही बताया कि फ‍िल्‍म का पहला हिस्‍सा तो लोगों को बांधने में कामयाब रहा, लेकिन दूसरे हिस्‍से में दर्शक खुद को फ‍िल्‍म से जोड़ नहीं पाये. फ‍िल्‍म के निर्देशक करन दर्रा ने लव स्‍टोरी को तो बेहद खूबसूरती के साथ पेश किया, लेकिन उस लव स्‍टोरी में हॉरर सीन्‍स कहीं फीके से दिखाई दिये. फ‍िल्‍म के गानों ने भी कोई खास जादू नहीं चलाया. हां, काफी हद तक फ‍िल्‍म के डायलॉग्‍स ने लोगों को खुश किया. कुल मिलाकर सिर्फ एक बार देखने के लिये फ‍िल्‍म बुरी नहीं है, लेकिन सिर्फ एक बार.
Courtesy by Mid Day

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