शाम होते ही अंधेरे में डूब जाती है मंडी

2015-04-04T07:00:06Z

-स्थापना के बाद से ही नहीं हुई मरम्मत

-पोल हो चुके हैं जर्जर, वायरिंग भी ध्वस्त

-हमेशा खतरा रहता है शॉट सर्किट का

GORAKHPUR: महेवा मंडी के आधुनिकीकरण का दावा सिर्फ कागजों तक ही सिमटा है। यहां तो बिजली की व्यवस्था का बुरा हाल है। व्यापारियों के बीच जब आई नेक्स्ट ने बिजली की बात करनी शुरू की तो वे उबल पड़े। उनका कहना था कि क्99ख् से इस मंडी में कारोबार हो रहा है। व्यापारी कारोबार का लाइसेंस लेकर अपने अपने काम मेंजुट गए। समय गुजरता गया, लेकिन मंडी की हालत जस की तस है। मंडी की एक भी दुकानों की मरम्मत तक नहींकराई गई। आज की तारीख में दुकानों की इलेक्ट्रिक वायरिंग, पोल और स्ट्रीट लाइट्स जर्जर हो चुके हैं। इतना हो जाने के बाद भी जिम्मेदारों ने इसकी सुधि नहींली। अब तो दुकानदार अपनी जाल हथेली पर रख कर दुकान मेंबैठते हैं। अगर कोई शार्ट सर्किट होता है तो उनकी जान सूख जाती है। न जाने कौन सा हादसा हो जाए।

अंधेरे में डूब जाती है मंडी

मंडी में बी और सी श्रेणी की तीन सौ से ज्यादा दुकानें हैं। मंडी में तीन हाई मास्ट लगाए गए। यह कुछ दिन तो चले और जले। एक बार खराब हुए तो वे खराब ही रह गए। मरम्मत न होने की वजह से सभी हाई मास्ट दम तोड़ गए। आज वे सिर्फ देखने की चीज हैं। एक का बल्ब तो दो के तार और बल्ब दोनों खराब हैं। इसको लेकर व्यापारियों ने मंडी समिति से कई बार शिकायत की, लेकिन आज भी वे शाम होते ही अंधेरे में रहने को मजबूर हैं।

व्यापारियों को सताता है डर

बिजली की चरमराती व्यवस्था की वजह से व्यापारी काफी परेशान रहते हैं। अंधेरा होने की वजह से उन्हें डर सताता है कि कहींदुकानों पर चोर धावा न बोल दें। बता दें कि कई बार गल्ला, फल मंडी और आलू मंडी में चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं। व्यापारियों ने मामले को समिति के सामने भी रखा था, लेकिन उन्हें कोरे आश्वासन के सिवा कुछ नहींमिला। आज भी स्थितियां जस की तस बनी हुई है।

दुकानों में वायरिंग सड़ चुकी है। पाइप भी टूट चुके हैं। इस संबंध में कई बार व्यापारी मंडी समिति के जिम्मेदारों से बात की गई तो उन्होंने आश्वसान देकर टरका दिया। आज व्यापारी अंधेरे में रहने को मजबूर हैं।

फिरोज अहमद राईन,

महामंत्री, फल-सब्जी विक्रेता एसोसिएशन

प्रदेश सरकार चार मंडियों का आधुनिकीकरण करने जा रही है। इसमें गोरखपुर की महेवा मंडी भी शामिल है। प्रस्ताव बनाकर भेजा जा रहा है। बजट आने के बाद काम शुरू कर दिया जाएगा।

सुभाष यादव, सचिव, मंडी समिति


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