फीगर मेंटेन करने के चक्कर में मां ने नवजात को रखा दूध से दूर

2019-05-05T12:09:39Z

एक सर्वे में ये खुलासा हुआ है कि ज्यादातर मांए अपने नवजात बच्चों को अपने दूध से दूर रखती हैं ताकि वो अपना फिगर मेंटेन कर सकें। यहां देखें पूरा आंकड़ा

- शहर की 62 फीसद मां नवजात को नहीं पिलाती हैं अपना दूध

- नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 में खुलासा हुआ, बच्चों पर पड़ रहा दुष्प्रभाव

vinod.sharma@inext.co.in

VARANASI: बच्चे के जन्म के तुरंत बाद मां का दूध अमृत के समान होता है. जिस बच्चे को छह महीने तक मां के दूध मिले उसकी सेहत बहुत अच्छी रहती है. पर आपको जानकर हैरानी होगी कि बनारस की ढेरों ऐसी मां जिन्हें जिगर के टुकड़े से ज्यादा अपनी फीगर की चिंता है. उनका फीगर खराब न हो इसलिए बच्चे को अपना दूध नहीं पिलाती हैं. शहर में ऐसी एक-दो मां नहीं बल्कि 62 फीसद हैं. यह खुलासा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 में हुआ है.

मां का दूध सबसे अच्छा आहार
जिला महिला अस्पताल की डॉ. लिली बताती हैं कि बच्चे के संपूर्ण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए मां का दूध बहुत जरूरी होता है. मां के दूध में शिशु के लिए आवश्यकतानुसार पानी होता है, इसलिए छह माह तक के बच्चे को अलग से पानी देने की भी जरूरत नहीं होती. बच्चा स्वस्थ रहे इसके लिए छह माह तक केवल मां का दूध ही पिलाना चाहिए. इसके अलावा ब्रेस्ट फीडिंग बच्चे में भावनात्मक लगाव पैदा करने के साथ ही सुरक्षा का बोध भी कराता है.

निमोनिया रहता है दूर
आंकड़े बताते हैं कि छह माह तक शिशु को केवल ब्रेस्ट फीडिंग कराने से दस्त और निमोनिया के खतरे में भी 11 से 15 फीसदी तक कमी लाई जा सकती है. डॉ. लिली का कहना है कि यदि बच्चे को जन्म के पहले घंटे के अंदर मां का पहला पीला गाढ़ा दूध पिलाया जाए तो उनमें प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ जाती है. बच्चे को छह माह तक लगातार केवल मां का दूध दिया जाना चाहिए. उसके साथ किसी अन्य पदार्थ जैसे पानी, घुट्टी, शहद, गाय अथवा भैंस का दूध नहीं देना चाहिए. बच्चे को हर डेढ़ से 2 घंटे में भूख लगती है. इसलिए बच्चे को जितना अधिक बार संभव हो सके मां का दूध पिलाते रहना चाहिए. मां का शुरुआती दूध थोड़ा कम होता है, लेकिन वह बच्चे के लिए पूर्ण होता है. इसके अलावा ब्रेस्ट फीडिंग मां को स्तन कैंसर से भी बचाता है.

सर्वे-4 में ये आंकड़े सामने आए

18.5

फीसद मदर ही बच्चे के जन्म के एक घंटे के अंदर ब्रेस्ट फीडिंग कराती हैं.

37.8

फीसद मदर छह माह तक के नवजात को ब्रेस्ट फीडिंग कराती हैं.

5.9

फीसद बच्चे (एज 6-23) मां के दूध के साथ समुचित आहार ले रहे हैं.

4.5

फीसद बच्चे (एज 6-23) सिर्फ समुचित आहार ले रहे हैं.

38.6

फीसद बच्चों (अंडर 5 ईयर) का एज के हिसाब से लम्बाई नहीं बढ़ रही है.

24.8

फीसद बच्चों (अंडर 5 इयर) का लम्बाई के हिसाब से वजन नहीं बढ़ रहा है.

15

प्रतिशत निमोनिया के खतरे में ब्रेस्ट फीडिंग से कमी लाई जा सकती है.

33

फीसदी बाल मृत्यु दर ब्रेस्ट फीडिंग से कम हो सकती है.

Posted By: Vivek Srivastava

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