कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर व अन्य की जमानत मंजूर

2019-04-06T08:55:16Z

घटना 17 अगस्त 2015 की है कांग्रेस के शीर्षस्थ नेताओं ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में पांच हजार कार्यकर्ताओं के साथ लक्ष्मण मेला स्थान पर धरना प्रदर्शन किये

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PRAYAGRAJ: कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व फिल्म अभिनेता राजबब्बर, प्रदीप जैन, बोधलाल शुक्ला, एके शर्मा, रमेश मिश्रा, निर्मल खत्री, मधुसूदन मिस्त्री, ओंकारनाथ सिंह, प्रदीप माथुर ने विशेष कोर्ट एमपी-एमएलए में सरेन्डर अर्जी दिया. कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में लेने के बाद जमानत अर्जी पर सुनवाई किया. आधार पर्याप्त होने पर प्रत्येक द्वारा पचास-पचास हजार रुपए के दो जमानतदार व इतनी ही धनराशि का निजी मु्रचलका पेश करने पर रिहा किये जाने का आदेश दिया.

चार साल पहले का है मामला
घटना 17 अगस्त 2015 की है. कांग्रेस के शीर्षस्थ नेताओं ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में पांच हजार कार्यकर्ताओं के साथ लक्ष्मण मेला स्थान पर धरना प्रदर्शन किये. इसमें गन्ना भुगतान, अपराध व भ्रष्टाचार, पेट्रोल मूल्य वृद्धि पर जोशीला भाषण दिया फिर विधानसभा का घेराव करने के लिए चल पड़े. पुलिस ने बैरियर लगाकर रोकने की कार्यवाही किया तभी प्रदर्शनकारियों व पुलिस से धक्का-मुक्की व पथराव की घटना हुई. पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने जानलेवा हमला किया.

बचाव पक्ष का ये है कहना
बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि अभियोजन कहानी कपोल-कल्पित है, किसी को कोई चोट नहीं पहुंचाई गयी, राजनीति से प्रेरित होने के कारण मुकदमा दर्ज कराया गया है. वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी राधाकृष्ण मिश्र व शासकीय अधिवक्ता राजेश गुप्ता ने जमानत अर्जी का प्रबल विरोध करते हुए तर्क रखा कि अभियुक्तों ने प्रशासनिक अधिकारियों पर जान लेवा हमला किया जिसमें कई लोगों को चोट आई जिसकी पुष्टि इंजरी रिपोर्ट से होती है. सभी की जमानत अर्जी खारिज की जाय. उभयपक्ष की बहस एवं तर्क सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने अपने निष्कर्ष में पाया कि अभियुक्तों के आचरण से जहां एक ओर व्यक्ति, समाज, राष्ट्र प्रभावित हुआ है वहीं दूसरी तरफ अभियुक्तों की स्वतन्त्रता पर भी विचार किया जाना है. जमानत का पर्याप्त आधार पाये जाने पर जमानत अर्जी मंजूर की गयी.

पूर्व सपा सांसद के विरुद्ध एनबीडब्ल्यू
सपा से पूर्व सांसद राकेश सचान को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किये जाने का आदेश दो मुकदमों में विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने किया है. इनके विरुद्ध कानपुर जिले के थाना कोतवाली में 22 सितम्बर 1990 को मुकदमा दर्ज हुआ था कि चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर के घर में घुसकर मारपीट व धमकी दिया था. दूसरा मामला 13 सितम्बर 1996 को थाना कोतवाली में दर्ज हुआ जिसमें आरोप था कि निषेधाज्ञा के दौरान शस्त्र लाइसेंस लेकर शामिल थे.

धोखाधड़ी में जमानत खारिज
धोखाधड़ी करने के आरोपित सतीश कुमार उर्फ दीपक व हरीश कुमार उर्फ पंकज थाना-झूंसी की जमानत अर्जी अपर जिला जज आरएमएन मिश्रा ने खारिज कर दी. वादी के अधिवक्ता कुश कुमार पाण्डेय ने कोर्ट को बताया कि अभियुक्तों ने भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त कर्मचारी को धोखा देकर फर्जी जमीन दिखाकर 36 लाख रुपया ले लिया है.


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