स्टूडेंट्स पढ़ेंगे सी फॉर साइबर क्राइम का पाठ

Updated Date: Sat, 15 Feb 2020 05:45 AM (IST)

- स्कूल व कॉलेजेज में स्टूडेंट्स को बताए जाएंगे साइबर क्राइम से बचने के तरीके

GORAKHPUR: साइबर क्राइम की बढ़ती घटनाओं और बड़ी संख्या में टीनएजर्स और यूथ्स के इसकी चपेट में आने के मद्देनजर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पहल की है। जिसके तहत चाइल्ड लाइन, बाल संरक्षण अधिकारी, पुलिस विभाग और जिला प्रोबेशन ऑफिस की संयुक्त टीम स्कूल और कॉलेजेज के स्टूडेंट्स को साइबर अपराधियों के चंगुल से बचने का पाठ पढ़ाएगी। इसके तहत टीम स्कूल-कॉलेजेज में जाकर अवेयरनेस कैंपेन चलाएगी। वहीं, साइबर सेफ्टी की जानकारी देने और साइबर अपराधियों से बचाव के लिए एक बुक तैयार की गई है। जिसके जरिए बच्चों को साइबर धमकी, सोशल साइटों पर बहलाने-फुसलाने, ऑनलाइन गेमिंग, ई मेल धोखाधड़ी, ऑनलाइन लेन-देन धोखाधड़ी, सोशल नेटवर्किग प्रोफाइल के साथ छेड़छाड़ से सुरक्षा के उपाय और जानकारी आकर्षक और सरल तरीके से दी गई है।

सोशल साइट्स पर देते हैं ज्यादा टाइम

इन दिनों सोशल मीडिया पर जिस तरह टीनएजर्स और यूथ्स अपना ज्यादा से ज्यादा टाइम एक्सपेंड कर रहे हैं। वहीं साइबर क्राइम होने के चांसेज भी बढ़ चुके हैं। जिसे लेकर गवर्नमेंट भी अलर्ट मोड में आ चुकी है। जिला प्रोबेशन ऑफिस से मिली जानकारी के मुताबिक, जिलेभर के स्कूल व कॉलेजेज में स्टूडेंट्स को साइबर क्राइम के बारे में जागरूक करने के लिए अवेयरनेस कैंपेन चलाया जाएगा।

बढ़ता जा रहा साइबर क्राइम

जिला प्रोबेशन अधिकारी सरबजीत सिंह ने बताया कि इंटरनेट, कंप्यूटर, स्मार्ट फोन और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के अन्य जरिए आधुनिक जीवन का जरूरी हिस्सा बन गए हैं और स्कूली बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक हर कोई ज्यादातर समय इनका इस्तेमाल करता है। इससे साइबर क्राइम्स की संख्या भी निरंतर बढ़ रही है। 'इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम' की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017 में देश में 53 हजार साइबर क्राइम की घटनाएं हो चुकी हैं। जिसके तहत बच्चों को अवेयर करने की ये योजना बनी है। चाइल्ड लाइन, बाल संरक्षण अधिकारी व पुलिस विभाग की टीम के साथ मिलकर जिला प्रोबेशन ऑफिस के जिम्मेदार अवेयरनेस कैंपेन चलाएंगे।

मुसीबत से निकालेगा चाइल्ड लाइन

वहीं जिला प्रोबेशन डिपार्टमेंट के अंडर आने वाले चाइल्ड लाइन के को-ऑर्डिनेटरसत्य प्रकाश ने बताया कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार के निर्देश में चाइल्ड लाइन संचालित होता है जिसका इमरजेंसी नंबर 1098 है। अगर कोई भी 0-18 वर्ष का बच्चा किसी भी मुसीबत में पड़ता है तो उसे उस मुसीबत से निकालना हमारा काम है। मुसीबत में फंसे बच्चों को निकालने के लिए चाइल्ड लाइन से संपर्क भी किया जा सकता है।

यूं साइबर क्रिमिनल बनाते हैं शिकार

- मोबाइल फोन पर आने वाले प्रलोभन जैसे लॉटरी लगना, परीक्षा पास करवाना के जरिए।

- भेजते हैं नौकरी लगवाना, लोन दिलवाना, खाता-बंद चालू करवाने आदि के मैसेज।

- फोटो-वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर उसे फेसबुक या व्हाट्सएप पर वायरल कर।

- किसी की प्राइवेट बातों या वीडियो रिकॉर्ड कर उसे ब्लैकमेल करना।

ऐसे बच्चों को भी मिलेगी हेल्प

- कोई बच्चा अकेला और बीमार हो।

- किसी बच्चे को आश्रय की जरूरत हो।

- कोई बच्चा छोड़ दिया गया हो या गुम हो गया हो।

- अगर कहीं कोई बच्चा (ईंट के भट्टे, होटल, रेस्टोरेंट, फैक्ट्री, दुकान आदि या कहीं और मजदूरी कर रहा हो।

- रास्ते पर किसी बच्चे का उत्पीड़न हो रहा हो।

- बाल विवाह हो, मानसिक या शारीरिक हिंसा से पीडि़त हो।

- किसी बच्चे का शोषण हो रहा हो।

- कोई बच्चा नशे का आदी हो।

- कोई बच्चा भीख मांग रहा हो।

वर्जन

चाहे साइबर क्राइम से जुड़े मामले में टीनएजर्स या यूथ्स मुसीबत में फंसे हों या फिर किसी अन्य मामले में, उन्हें उस मुसीबत से निकालने के लिए हमारी टीम सक्रिय है। हम उन्हें पूरी तरह से प्रोटेक्ट करेंगे और अवेयर करेंगे।

सरबजीत सिंह, डीपीओ, जिला प्रोबेशन ऑफिस

Posted By: Inextlive
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