-हिंदी दिवस के मौके पर डीडीयूजीयू के हिंदी डिपार्टमेंट में पसरा रहा सन्नाटा

- हिंदी दिवस न मनाए जाने को लेकर जेआरएफ ने उठाए कई सवाल

GORAKHPUR: 'चिराग तले अंधेरा' यह कहावात डीडीयू गोरखपुर यूनिवर्सिटी के हिंदी डिपार्टमेंट पर बिल्कुल सटीक बैठती है। हिंदी दिवस पर सिटी में धूम रही, लेकिन हिंदी का डिपार्टमेंट होते हुए भी यहां सन्नाटा पसरा रहा। आलम यह था कि हिंदी दिवस मनाने की उत्सुकता लिए डिपार्टमेंट पहुंचे स्टूडेंट्स को मायूसी हाथ लगी और उन्हें बैरंग वापस लौटना पड़ा। अब इसे अनदेखी ही कहेंगे कि बड़े-बड़े दिग्गज साहित्यकारों और विद्वानों से हमेशा जुड़ा रहने वाला यह डिपार्टमेंट हिंदी दिवस पर ही सूना रहा। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, बल्कि विभाग से जुड़े लोगों की मानें तो पिछले कई सालों से यहां हिंदी दिवस नहीं सेलिब्रेट किया गया, जबकि साहित्य एकेडमी से लेकर हिंदी यूनिवर्सिटी तक यहां के लोग परचम लहराए हुए हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर पहचान के बाद भी यह हाल

दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर यूनिवर्सिटी की पहचान राष्ट्रीय स्तर की बन चुकी हैं। इसे दुर्भाग्य ही कहेंगे कि जहां सरकारी और गैरसरकारी महकमों में हिंदी दिवस और राजभाषा सप्ताह मनाया जा रहा है। वहीं हिंदी विभाग में कोरम पूरा करने के लिए भी कोई कार्यक्रम नहीं आयोजित किया गया। यूनिवर्सिटी के कुछ शिक्षकों की मानें तो नई पीढ़ी के हिंदी टीचर्स अब इसे सेलिब्रेट करने के पक्षधर नहीं हैं। वहीं कुछ लोग दूसरी जगह जाकर मुख्य अतिथि बनने के लिए उत्साहित रहते हैं।

बड़े उम्मीद से आए थे जेआरएफ

वहीं जेआरएफ गौरव पांडेय, लक्ष्मी शंकर व प्रशांत कुमार बताते हैं कि हम सब इस उम्मीद से आए थे कि हिंदी दिवस मनाया जा रहा होगा। लेकिन यहां हिंदी दिवस मनाना तो दूर, कोई नजर भी नहीं आया। वहां कुछ प्रोफेसर्स तो मौजूद थे, लेकिन इसको सेलिब्रेट कराए जाने को लेकर किसी ने भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया। प्रो। राम दरश राय ने बताया कि हिंदी दिवस को मनाया जाना चाहिए। यह बहुत ही दुर्भाग्य है कि हमारे डिपार्टमेंट में हिंदी दिवस नहीं मनाया जाता है, लेकिन अगले साल से इस बात की पूरी कोशिश की जाएगी कि हिंदी दिवस मनाया जाए।

इन्होंने दिलाई है पहचान -

- प्रो। भगवती प्रसाद सिंह

- प्रो। रामचंद्र तिवारी

- प्रो। सत्यनारायण त्रिपाठी

- प्रो। जगदीश प्रसाद श्रीवास्तव

- प्रो। परमानंद श्रीवास्तव

- प्रो। गिरीश रस्तोगी

- प्रो। रामदेव शुक्ल

- प्रो। विश्वनाथ प्रसाद तिवारी

- प्रो। अनंत मिश्र

- प्रो। कृष्ण चंद्र लाल

पिछले कई वर्षो से हिंदी दिवस नहीं मनाया जा रहा है, लेकिन दूसरे संस्थाओं में हिंदी डिपार्टमेंट के शिक्षक जरूर शामिल होते हैं। अब क्यों नहीं मनाया जाता है। इसके लिए आपस में बात की जाएगी।

प्रो। जर्नादन, एचओडी, हिंदी डिपार्टमेंट, डीडीयूजीयू

Posted By: Inextlive