डॉल्फिन को बचाने की कोशिश करने वालों का कहना है कि पश्चिमी नेपाल की नदियों में पाई जाने वाली इस दुर्लभ मछली पर अंधाधुंध शिकार की वजह से जबर्दस्त खतरा मंडरा रहा है.

नेपाल की नदियों में खासतौर पर मॉनसून में डॉल्फिन पाई जाती हैं। इनमें कंधा, पथरैया और मोहना नदियां भी शामिल हैं जो करनाली नदी की सहायक नदियां हैं।

करनाली नदी भारत की सीमा से लगते हुए पूरे दक्षिणी नेपाल में बहती है और भारत पहुंचकर घाघरा नदी के नाम से जानी जाती है। नेपाल में अब स्थानीय अधिकारी नदी में मछली पकड़ने के लिए विभिन्न समूहों को ठेके देने लगे हैं।

कैलाली में तराई आर्क लैंडस्केप कंजरवेशन प्रोग्राम के प्रबंधन प्रकाश लमसाल कहते हैं, ''इसकी वजह से डॉल्फिन के लिए खतरा पैदा हो गया है। अंधाधुंध तरीके से मछलियां मारी जा रही हैं.''

उनका कहना है कि अधिकारियों को इन नदियों में अंधाधुंध तरीके से मछली मारने पर रोक लगानी चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में घाघरा नदी से ये डॉल्फिन सहायक नदियों में आ जाती होंगी। इन सहायक नदियों में डॉल्फिनों की कोई आधिकारिक गिनती नहीं है लेकिन माना जाता है कि 20 से ज्यादा डॉल्फिन होंगी।

पर्यटन की चिंतानेपाल का सुदूर पश्चिमी इलाका पर्यटकों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र नहीं है। स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि इन डॉल्फिनों को यदि सही तरीके से सहेजा गया तो पर्यटन के मामले में यहां के हालात बदल सकते हैं।

एक स्थानीय कारोबारी कृष्ण बहादुर महारा का कहना है, ''सरकार को इन डॉल्फिनों को बचाने के लिए कदम उठाना चाहिए ताकि हम पर्यटकों को आकर्षित कर सकें.''

उन्हें डर है कि स्थानीय अधिकारियों ने मछलियों का अंधाधुध शिकार रोकने के लिए कदम नहीं उठाए तो ये डॉल्फिन इन नदियों से कहीं और भी जा सकती हैं।

एक स्थानीय कार्यकर्ता भोजराज श्रेष्ठ का कहना है, ''स्थानीय अधिकारियों से इस बारे में कई बार कहा गया, अंधाधुंध शिकार रोका नहीं गया तो हम इन डॉल्फिनों को शर्तिया खो देंगे.'' लेकिन स्थानीय अधिकारी इस बात से इनकार करते हैं कि उनकी वजह से डॉल्फिनों के लिए खतरा पैदा हुआ है।

कैलाली के स्थानीय विकास अधिकारी गोकर्ण प्रसाद शर्मा कहते हैं, ''जहां डॉल्फिन हैं, हमने वहां अंधाधुंध तरीके से मछली मारने की किसी को अनुमति नहीं दी है। हमने तो ये कहा है कि उन इलाकों में मछली पकड़ने से बचा जाए। जब हम किसी को मछली पकड़ने का ठेका देते हैं तो उसके साथ ये शर्त जुड़ी होती है.''

लेकिन उन्होंने ये माना कि अधिकारी इसकी ज्यादा निगरानी नहीं करते कि ठेकेदार इस शर्त का पालन कर रहे हैं या नहीं। वे कहते हैं कि इस पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है।

Posted By: Inextlive