एक ओर भारत-पाक सीमा पर तनाव बढ़ रहा है और दूसरी ओर दोनों देशों से जुड़े लोग देश में शांति और अमन की कामना में लगे हैं कि कैसे भी हो लेकिन दोनों देशों में अमन चैन और शांति का वातवरण स्‍थापित हो जाए. ऐसे में नोबेल शांति पुरस्‍कार विजेता कैलाश सत्‍यार्थी और पाकिस्‍तान की मलाला यूसुफजई दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध बनाने के लिए संयुक्‍त रूप से काम करने को राजी हो गए और इसके साथ ही रखी हैं देश में अमन-चैन लाने की भी कई शर्तें.

दोनों देशों के पीएम से समारोह में शरीक होने की अपील
मलाला ने कहा कि वह और सत्यार्थी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ तथा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिसंबर में ओस्लो में पुरस्कार समारोह में शरीक होने की अपील करेंगे. वह शरीफ और मोदी से शांति सुनिश्चित करने के लिए भी एक विनम्र अनुरोध करेंगे. मलाला ने कहा कि इस पुरस्कार को पाने वाली वह प्रथम पाकिस्तानी और सबसे कम उम्र की होंगी. उन्होंने यह पुरस्कार उन बच्चों को समर्पित किया जिनकी आवाज सुने जाने की सबसे ज्यादा जरूरत है.
मलाला ने कहा...
मौके पर मलाला यूसुफजई ने कहा कि वह और सत्यार्थी दोनों साथ काम करेंगे और भारत-पाकिस्तान के बीच मजबूत संबंध बनाने के लिए अपनी पूरी कोशिश लगा देंगे. उन्होंने कहा कि यह सचमुच में हताश करने वाली बात है कि दोनों देश आपसी झड़प में लगे हुए हैं. शांति बनाए रखने के लिए दोनों देशों को चाहिए कि लड़ाई-झगड़ों को शांत करने का पूरे प्रयास में जुट जाएं और अमन चैन की बातें करें.     
'मैं सचमुच शांति में यकीन रखती हूं'
सत्यार्थी के साथ इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुने जाने के बाद मलाला (17) ने कहा, 'हम अच्छा संबंध चाहते हैं, मैं सचमुच में शांति में यकीन रखती हूं.' उन्होंने कहा कि लड़ाई के बजाय देश की प्रगति और विकास के लिए काम करना जरूरी है, जिसका दोनों देशों और उसके नागरिकों को लाभ मिलेगा, न कि एक-दूसरे को नीच दिखाने का.

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Posted By: Ruchi D Sharma