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KANPUR: हैलट में डॉक्टर्स हड़ताल और नारेबाजी करते रहे वहीं इमरजेंसी की चौखट पर ट्रीटमेंट न मिलने से एक महिला ने की जान चली गई. हालांकि डॉक्टर्स का कहना था कि इमरजेंसी में आने के पहले ही महिला की डेथ हो चुकी थी. हास्पिटल की इमरजेंसी सेवाएं बाधित होने की सूचना पर मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल अपनी टीम के साथ हास्पिटल पहुंच गइं और रोगियों का ट्रीटमेंट शुरू कराया. उनका दावा रहा कि वहां आए हर गंभीर मरीज को इलाज दिया गया.

शव ले जाने के लिए भी नहीं थे पैसे
रूहीडेरा सिकन्दरा के रहने वाले अन्नू की वाइफ रीता(27) ने किसी बात पर नाराज होकर घर में रखी डाई पी ली. हालत बिगड़ने पर परिवार वाले उसे लेकर स्थानीय हास्पिटल ले गए जहां से उसे हैलट रिफर कर दिया गया. हैलट में जिस टाइम रीता को लेकर परिजन पहुंचे थे उस टाइम कोलकाता प्रकरण पर डॉक्टर्स प्रोटेस्ट कर रहे थे. अन्नू ने बताया कि ट्रीटमेंट न मिलने की वजह से डेथ हो गई. हालांकि इमरजेंसी में काम कर रहे डॉक्टर्स का कहना था कि उसकी डेथ रास्ते में हो गई थी. घर वापस ले जाने के लिए अन्नू के पास पैसे नहीं थे. दैनिक जागरण आईनेक्स्ट के रिपोर्टर ने इस मैटर पर प्रिंसिपल डॉ. आरती लाल चंदानी से मदद करने को कहा. जिस पर प्रिंसिपल व उनके सहयोगी कर्मचारियों ने उसे शव घर ले जाने के लिए 2500 रुपए दिए.

सभी डिपार्टमेंट्स का काम ठप करा दिया
हैलट की ओपडी अपने शेड्यूल टाइम सुबह 9 बजे स्टार्ट हो गई थी. लेकिन करीब साढ़े दस बजे जेआर ने ओपीडी समेत सभी डिपार्टमेंट्स का काम ठप करा दिया और जोरदार नारेबाजी. प्रोटेस्ट की अगुवाई डॉ. राजेश पटेल व डॉ. अभिनीत कर रहे थे. डॉक्टर्स का कहना था कि इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित नहीं की गई हैं. ओपडी में जरूर काम बंद कराया है. जब तक डॉक्टर्स के प्रोटक्शन के लिए कोई एक्ट नहीं बनेगा तब तक होम लोग इसी तरह से प्रोटेस्ट जारी रखेंगे.

'' इमरजेंसी सेवाएं किसी भी हालत में बंद नहीं की गई हैं. रोगियों का इलाज किया जा रहा है. एक पैरालिसिस के रोगी को एडमिट न करने की बात गलत है. इमरजेंसी में आने वाले सभी पेशेंट का ट्रीटमेंट किया जा रहा है. हम लगातार मानीटरिंग कर रहे हैं.''

डॉ. आरती लाल चंदानी, प्रिंसिपल जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर

Posted By: Manoj Khare