1. सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है? अब सबको फैसले का इंतजार है। आप कई दशकों से इस मामले से जुड़े हैं। इस पर आपकी कोई टिप्पणी?

एक ओर केंद्र में पीएम मोदी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार है और दूसरी यूपी में योगी जी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार...अब अगर मंदिर नहीं बनेगा तो फिर कब मंदिर बनेगा। मुझको पूरा विश्वास है कि कोर्ट का फैसला आते ही सरकार भी मंदिर बनाने के लिए हमारा पूरा साथ देगी। अब समय आ चुका है कि हम लोग एकजुट होकर अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनाने में अपना योगदान दें।

2. अयोध्या में सरकार की ओर से एहतियात के तौर पर सुरक्षा बढ़ाई गई है? क्या इसकी जरूरत है?

सरकार ने अच्छा किया कि सुरक्षा बढ़ा दी है। जिसको अयोध्या के लोग सकारात्मक रूप में ले रहे हैं। सरकार जो कभी कदम उठा रही है वो बहुत सराहनीय है। लोगों की भलाई के लिए योगी जी की सरकार काम कर रही है। एक बड़ी बात बता दूं कि अयोध्या का सौहृार्द कभी कम नहीं होगा। चाहें अराजकतत्व कितनी भी कोशिश कर लें लेकिन अयोध्या नगरी हमेशा मुस्कुराती दिखेगी। अयोध्या को किसी की नजर न लगे, इसके लिए मैं तो प्रभु श्रीराम से हमेशा प्रार्थना करता हूं। पूरी अयोध्या नगरी हमेशा जगमगाती रहे। इससे बढ़कर और कोई खुशी मेरे लिए नहीं हो सकती है। मैं हर अयोध्यावासी से प्रेम करता हूं फिर वो चाहे कोई भी हो।

3. अयोध्या के लोगों का कहना है कि कारसेवकपुरम् में मंदिर बनाने के लिए काफी लंबे समय से तैयारी हो रही है। क्या-क्या काम वहां हो रहा है?

कारसेवकपुरम् में कई वर्षों से श्रीराम लला का मंदिर बनाने के लिए पत्थरों की कटाई से लेकर नक्काशी का काम हो रहा है। पहले मैं खुद भी कई बार वहां गया हूं लेकिन काफी उम्र होने से वहां नहीं जा पाता हूं। लेकिन वहां कारसेवक पूरी तन्मयता के साथ पत्थरों को तराशने का काम कर रहे हैं। इसके अलावा भी पूरी तैयारी कई वर्षों से चल रही है। मुझको कोर्ट पर पूरा विश्वास है कि फैसला हमारे पक्ष में आएगा। कई वर्षों से इंतजार कर रहा हूं कि कोर्ट का फैसला आने के बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बने और मैं श्रीराम लला की आरती हूं। पहले 24 घंटे श्रीराम लला के दरबार में कीर्तन होता था लेकिन न जाने किसी 'नजर' लगी और बहुत कुछ बदल गया। भगवान के घर देर है पर अंधेर नहीं। सबकुछ पहले जैसा होगा, बस समय लग रहा है। हमको अपनी न्याय प्रणाली पर पूरी विश्वास है।

4. युवाओं के लिए आप क्या संदेश देंगे? जिससे वो मुश्किलों से लड़कर जीत हासिल करें।

सबसे पहले तो मैं देश के हर युवा से यही कहूंगा कि वो नशे की लत को पूरी तरह छोड़ दें। अपने आप पर विश्वास रखें। हमेशा धैर्य बनाकर रखें। छोटी-छोटी मुश्किलों से घबराएं नहीं। मेरा मानना है कि युवा सिर्फ श्रीमद्भागवत गीता के कुछ अध्याय को जरूर पढ़ें। वो हमको जीने की कला सिखाती है। गीता में बताया गया है कर्म करिए फिर ईश्वर जरूर आपकी सुनेगा। क्योंकि उसकी निगाहें आप पर हैं। इसको बात जरूर आत्मसात करना चाहिए। समय जरूर बदल रहा है कि लेकिन अपने आपको ईश्वर से दूर मत करिए। ये जरूरी नहीं है कि दिनभर पूजा करिए लेकिन ये बहुत जरूरी है कि उस परमपिता परमेश्वर पर विश्वास रखिए।

5. आपके लाखों अनुयायी इस देश में हैं? उनके लिए कोई संदेश देंगे?

देश से बढ़ा कुछ नहीं हो सकता है। इस बात को हर देशवासी को समझना होगा। राष्ट्र प्रेम की भावना हर देशवासी के हृदय में जगनी ही चाहिए। सभी कोई एक दूसरे के साथ भाईचारे के साथ रहना चाहिए। सभी देशवासियों के हृदय में राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना भी जरूर होनी चाहिए। एक देशभक्ति गीत की कुछ लाइनें जो हर किसी को जरूर गुनगुनानी चाहिए...हे जन्मभूमि भारत, हे कर्मभूमि भारत...महिमा महान तू है, गौरव निधान तू है...तू प्राण है हमारी, जननी समान तू है...तेरे लिए जिएंगे...तेरे लिए मरेंगे, इस देश के सिवा हम जीवित नहीं रहेंगे...जिसका मुकुट हिमालय जगजगमगा रहा है...सागर जिसे रतन की अंजलि चढ़ा रहा है...ये देश है हमारा ललकार कर कहेंगे...इस देश के सिवा हम जीवित नहीं रहेंगे...

6. इस वक्त कई तरह की अफवाहों का बाजार पूरी तरह गर्म है, आप इस पर क्या कहना चाहेंगे?

देखिए अफवाहों पर ध्यान न दें। कोर्ट जो भी निर्णय देगा उसी के आधार पर आगे कार्य प्रारंभ किया जाएगा। हम सबको पूरी आशा है कि पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ही मंदिर निर्माण कार्य प्रारंभ होगा। अयोध्या में सबकुछ पूरी तरह ठीक है। सिर्फ अयोध्या की ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की कानून व्यवस्था ठीक है। श्रीराम भक्त धैर्य बनाए रखें। विरोधियों से सावधान रहें। श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए पत्थर तराशने का कार्य चल रहा है।

7. आप अयोध्या कब आए और भगवान श्रीराम के नाम में रमते चले गए। ये सब कैसे हुआ? कुछ बताना चाहेंगे इस अद्भुत यात्रा के बारे में?

इसका जवाब देना बहुत मुश्किल है। मेरा जन्म 11 जून 1938 को ब्रज भूमि पर हुआ। वहां प्रारंभिक शिक्षा गृहण करने के बाद ही ईश्वर की भक्ति में मन लगने लगा। दिनभर उनका नाम लेना और हमेशा भजनों को गुनगुनाते रहना...बस वहां से घर छोड़ दिया और प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या आ गया। जैसा मुझे याद है कि मैं 1953 में अयोध्या आ गया और यहां की गलियों में मैंने बहुत कुछ देखा वो नहीं बता सकता...मैंने बहुत कुछ महसूस किया। अयोध्या में आध्यात्मिकता का प्राकृतिक सौंदर्य है। इसकी पुरानी निर्मित इमारतों में, चंदन की खुशबू, राम भजन और छोटे और बड़े मंदिर हैं। यह संत और तपस्वियों का स्थान है। इन संतों में एक महान आत्मा है। यहां आने के मुझे याद है कि मैं भक्तों के साथ श्री मणिराम दास चवनी में रहने लगा। श्री मणिराम दास चवनी सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए सबसे बड़ा तीर्थ है। बस यहां आकर श्रीराम नाम में पूरी तरह रम गया। श्री मणिराम दास चवनी में एक सबसे बड़ा आर्कषण का केंद्र है। इसका विशाल स्तंभ। इस स्तंभ का महत्व श्रीमद्भागवत गीता है जो पूरी तरह से पूरे स्तंभ पर लिखी गई है। इस स्तंभ को गीता स्तम्भ के नाम से जाना जाता है। राम के नाम का जाप करते हुए भक्त इस स्तंभ की परिक्रमा करते हैं। श्री वाल्मीकि रामायण भवन श्री मणिराम दास चवनी में सबसे महत्वपूर्ण स्थान है। वाल्मीकि भवन की दीवार पर पूर्ण रामायण लिखी गई।

अथर्ववेद में है अयोध्या का जिक्र

अयोध्या भगवान राम का जन्म स्थान है। यह सबसे प्राचीन शहर है और रामायण के अनुसार यह हिंदुओं के कानून-दाता राजा मनु द्वारा स्थापित किया गया था। प्राचीन काल के दौरान इसे कोसलदेश के नाम से जाना जाता था। इस स्थान को अथर्ववेद में देवताओं द्वारा निर्मित और स्वयं स्वर्ग के रूप में समृद्ध होने वाले शहर के रूप में वर्णित किया गया है।

श्री मणिरामदास जी चावनी के 6वें पीठाधीश्वर हैं महंत नृत्यगोपाल दास

1. श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष श्रीश्री 1008 श्री नृत्यगोपाल दास जी महाराज अयोध्या स्थित श्री मणिराम दास चवनी के 6वें पीठाधीश्वर भी हैं। उनसे पहले श्री मणिराम दास जी महाराज, श्री वैष्णवदास जी महाराज, श्री रामचरण दास जी महाराज, श्री रामशोभा दास जी महाराज और श्री राममनोहर दास जी महाराज जी महाराज चवनी के पीठाधीश्वर रहे हैं।

2. महर्षि वाल्मीकि की स्मृति पर महंत नृत्य गोपाल दास जी ने वाल्मीकि और लव-कुश की प्रतिमा बनाई। अयोध्या में चवनी के क्षेत्र में महर्षि वाल्मीकि रिसर्च लाइब्रेरी की स्थापना महंत जी ने की थी, 1000 से अधिक पांडुलिपियन थे और उनके द्वारा 30,000 धार्मिक और ऐतिहासिक बुक्स वहां रखी गई हैं।

3. यहां एक बैंक का विकास भी महंत जी द्वारा किया गया है, लेकिन इस बैंक और अन्य बैंकों के बीच बहुत अंतर है, यहां पर पैसे निकालने का कोई आरबीआई का नियम नहीं है। केवल लोग राम का नाम लिखकर पैसे नाम जमा कर सकते हैं। हां, आप किसी भी चीज पर राम लिख सकते हैं और यहां जमा कर सकते हैं। इस बैंक को अंतर्राष्ट्रीय श्री सीता राम नाम बैंक के रूप में जाना जाता है।

Posted By: Shweta Mishra

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