अब इसे मोदी मैजिक कहें या फिर अर्थव्‍यवस्‍था की सुधरी चाल जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है. खबरों की मानें तो गुजरते साल में थोक बिक्री मूल्‍य आधारित मंहगाई दर में जबर्दस्‍त गिरावट दर्ज की गई इसके साथ ही यह शून्‍य पर आ गई है.

खुदरा मंहगाई दर हुई आधी
नया साल मंहगाई दर के लिहाज से काफी कुछ अच्छा गुजरने वाला है. जी हां, आंकडों पर नजर डालें तो पिछले साल में थोक बिक्री मूल्य पर आधारित मंहगाई दर में काफी गिरावट हुई है, जिसके चलते यह शून्य पर आ गई. वहीं अगर खुदरा मंहगाई दर की बात करें, तो यह भी आधी घटकर 4.4 परसेंट पर आ गई है. अब ऐसे में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये यह एक अच्छा संकेत दिखाई देता है. गौरतलब है कि पिछले कुछ सालों में मंहगाई दर की बढ़ते ग्रेड ने आर्थिक स्थिति को काफी प्रभावित किया था. फिलहाल नीति-निर्माताओं का कहना है कि मंहगाई दर में जो कमी दिख रही है, वह तुलनात्मक आधार का प्रभाव है. हालांकि एक्सपर्ट का यह भी मानना है कि इसे नीतिगत ब्याज दरों में बहु-प्रतीक्षित कटौती के लिये पर्याप्त नहीं माना जा सकता.
कच्चे तेल की कीमतों में कमी
एक्सपर्ट का कहना है कि, RBI ब्याज दरों में कटौती शुरु करने से पहले नये साल में मंहगाई दर में आई इस गिरावट को जरूर देखना चाहेगा. वहीं दूसरी ओर उद्योग और सरकार पूरे 2014 में नीतिगत ब्याज दर में कटौती की जरूरत पर जोर देती रही है. फिलहाल इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल और अन्य चीजों की कीमत गिरने के बीच संकेत है कि कम से कम खुदरा मंहगाई दर में गिरावट का रुख बरकरार रहेगा. आपको बताते चलें कि नवंबर महीने में खुदरा मंहगाई दर 4.4 परसेंट रही थी, जबकि 2014 की शुरुआत में यह करीब 9 परसेंट थी.

Hindi News from Business News Desk

 

Posted By: Abhishek Kumar Tiwari