नोबेल पुरस्‍कार विजेताओं की ओर से नोबेल संग्रहालय में नोबेल पुरस्‍कार विजेताओं की ओर से अनोखे तरीके से हस्‍ताक्षर करने की परंपरा को इस वर्ष शांति पुरस्‍कार विजेता कैलाश सत्‍यार्थी ने आगे बढ़ाया. इस क्रम में कैलाश सत्‍यार्थी ने एक कुर्सी पर हस्‍ताक्षर किया. इसको लेकर नोबेल संग्रहालय के क्यूरेटर तोबियास देगशेल ने जानकारी देते हुए बताया कि नोबेल की कुर्सियां संग्रहालय की सिर्फ शिल्पकृति मात्र नहीं हैं बल्कि अतिथियों की एक पुस्तिका भी है. इसमें संग्रहालय आने वाले नोबेल विजेताओं के हस्ताक्षर दर्ज होते हैं.

कैलाश सत्यार्थी ने क्या लिखा कुर्सी पर
इस दौरान सत्यार्थी ने कुर्सी के नीचे की ओर लिखा है, 'मेरे लिए यह कुर्सी अभी भी खाली है और लाखों बेसहारा बच्चों को बुला रही है और उनका इंतजार कर रही है.'  गौरतलब है कि कैलाश सत्यार्थी गत 12 दिसंबर को संग्रहालय गये थे. वहीं उनके साथ पुरस्कार जीतने वाली मलाला किसी कारणवश यूसुफजई संग्रहालय नहीं पहुंच सकीं, लेकिन मलाला ने अपना एक परिधान दान दिया. उसे प्रदर्शित किया गया है. जानकारी है कि संग्रहालय में इस तरह के 230 से ज्यादा दस्तखत मौजूद हैं.
 
संग्रहालय में भारत से जुड़ी रखी है एक और सामग्री
इस संग्रहालय में दस्तखत के रूप में अपनी निशानी छोड़ने वाले खास लोगों में राष्ट्रपति बराक ओबामा, तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा, अर्थशास्त्री जॉन नैश और डीएनए के खोजकर्ता जेम्स वाटसन का नाम भी शामिल है. सत्यार्थी के ऑटोग्राफ के अलावा इस संग्रहालय में भारत से जुड़ी एक और सामग्री भी यहां रखी हुई है. वह है अमर्त्य सेन की साइकिल. अमर्त्य सेन को 1998 में अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार मिला था.
 
क्या कहना है संग्रहालय के क्यूरेटर का
संग्रहालय के क्यूरेटर देगशेल ने बताया कि अर्थ जगत में साइकिल सिर्फ एक सामान्य उपकरण नहीं है. ठीक वैसे ही अमर्त्य सेन की साइकिल भी बेहद खास है. उनकी इस साइकिल ने उनके शोध में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. अमर्त्य सेन के काम का एक बहुत बड़ा हिस्सा इस पर केंद्रित रहा है. उन्होंने अमर्त्य सेन की इस साइकिल को भी संग्रहालय के नजरिये से काफी महत्वपूर्ण बताया.

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Posted By: Ruchi D Sharma