पंचमी एवं त्रियोदशी तिथि के सिद्ध योग में आज से शुरू हो रहा सावन

2019-07-17T10:33:58Z

17 जुलाई से श्रावण माह की शुरुआत हो रही है

22 जुलाई, पहला सोमवार
पंचमी तिथि, कार्य सिद्ध करने वाली, मूसल योग, अमृत योग एवं सिद्ध योग.

29 जुलाई, दूसरा सोमवार
द्वादशी तिथि/त्रियोदशी तिथि, प्रदोष व्रत(कृष्ण पक्ष),आनंद योग, सर्वार्थसिद्धि, अमृत सिध्द योग.
5 अगस्त, तीसरा सोमवार
पंचमी तिथि (नाग पंचमी) कार्य सिद्ध करने वाली, कल्की जयंती, सिद्ध योग, अमृत योग.
12 अगस्त, चौथा सोमवार
द्वादशी/त्रियोदशी तिथि,प्रदोष व्रत(शुक्ल).
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BAREILLY :
सावन माह आज से शुरू हो रहे हैं. चारों ओर वातावरण शिवमय रहेगा. कहते हैं कि जितनी वर्षा होती है, उतनी ही भगवान की कृपा मानी जाती है. शास्त्रों के मुताबिक शिव पूजन का यह महीना बेहद खास होता है. श्रावण के महीने में पड़ने वाले सोमवारों का भी विशेष महत्व माना जाता है. इस माह में पड़ने वाले मंगलवार का भी विशेष महत्व होता है. बालाजी ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पंडित राजीव शर्मा का कहना है कि श्रावण मास के मंगलवार को मंगला गौरी के नाम से जाना जाता है. इस दिन मंगल ग्रह के शांति के निमित्त एवं मां पार्वती को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा अर्चना एवं व्रत किया जाता है.
इसलिए शिव को प्रिय है श्रावण मास
पौराणिक कथा के अनुसार, जब सनद कुमारों ने महादेव से उनसे श्रावण मास प्रिय होने का कारण पूछा तो महादेव शिव ने बताया कि जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योग शक्ति से शरीर त्याग किया था, उससे पहले देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण लिया था, अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती रूप में हिमालय राज के घर में पुत्री रूप में जन्म लिया. पार्वती ने युवावस्था के श्रावण मास में निराहार रहकर कठोर व्रत किया और उन्हें प्रसन्न कर विवाह किया, जिसके बाद से ही महादेव के लिए श्रावण मास विशेष प्रिय हो गया.

इसलिए श्रावण पड़ा नाम

इस माह पूर्णिमा के दिन श्रवण नक्षत्र विद्यमान रहता है. इसी कारण इस माह का नाम श्रावण पड़ा. श्रावण मास का प्रत्येक दिन शिव पूजा के लिए विशिष्ट है. बिल्व पत्रों का भगवान शिव की पूजा में विलक्षण महत्व है.भगवान शिव बिल्व पत्रों से अति शीघ्र प्रसन्न होते हैं.

बिल्व पत्र का महत्व

पुराणों के अनुसार बिल्व पत्र के त्रिदल तीन जन्मों के पाप नाश करने वाले होते हैं. बिल्व पत्र के सम्बंध में विशेष ध्यान देने वाली बात यह है कि अन्य सभी पुष्प तो सीधी अवस्था में भगवान पर चढ़ाए जाते हैं, लेकिन एक मात्र बिल्व पत्र ही ऐसा है जो उल्टा रखकर भगवान शिव पर चढ़ाया जाता है. खास बात यह है कि बिल्व पत्र को दोबारा धोकर भी चढ़ाया जा सकता है. इसमें किसी प्रकार का दोष नहीं लगता.
श्रावण मास में शिव पूजा
श्रावण मास में महामृत्युंजय मंत्र, शिव सहस्त्रनाम, रुद्राभिषेक, शिवम हिमन्न स्त्रोत, महामृत्युंजय सहस्त्र नाम आदि मंत्रों का व्यक्ति जितना अधिक जाप कर सके उतना श्रेष्ठ होता है. स्कन्द पुराण के अनुसार, प्रत्येक दिन एक अध्याय का पाठ करना चाहिए. यह माह मनोकामनाओं का इच्छित फल प्रदान करने वाला होता है. नियम पूर्वक शिव पर बिल्व पत्र प्रतिदिन निश्चित संख्या मे ं(5,11, 21, 51, 108) तथा अर्क पुष्प चढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए. इस माह रुद्राष्टाध्यायी पाठ द्वारा शिव का पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए तथा रुद्री पाठ द्वारा सहस्त्रधारा से अभिषेक करना चाहिए. इस माह में बिल्व वृक्ष तथा कल्प वृक्ष का भी पूजन करना उत्तम रहता है.
शिव का कैसे करें पूजन
इस व्रत में भगवान शिव का पूजन करके एक ही समय भोजन किया जाता है. शिव एवं माता पार्वती का ध्यान कर शिव का पंचाक्षर मंत्र का जाप करते हुए पूजन करना चाहिए. सावन के प्रत्येक सोमवार को श्री गणेश जी, शिव जी, पार्वती जी तथा नंदी की पूजा करने का विधान है. शिव जी की पूजा में जल, दूध, दही, चीनी, घी, शहद, पंचामृत, कलावा, वस्त्र, यज्ञोपवीत, चंदन, रोली, चावल, फूल, बिल्व पत्र, दूर्वा, आक, धतूरा, कमलकट्टा, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, पंच मेवा, धूप, दीप, दक्षिणा सहित पूजा करने का विधान है. साथ ही, कपूर से आरती करके भजन, कीर्तन और रात्रि जागरण भी करना चाहिए. पूजन के बाद रुद्राभिषेक भी कराना चाहिए. ऐसा करने से भोलेनाथ शिव शीघ्र ही प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. सोमवार का व्रत करने से पुत्र, धन, विद्या आदि मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है.
हर सोमवार पूजा का समय

प्रात: 5.40 से 7.20 बजे
9.20 से 10.45 बजे
अमृत एवं शुभ के चौघडि़या मुहूर्त में
अपराह्न 3.45 से शाम 7.15 बजे तक लाभ, अमृत के चौघडि़या में



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