बूंद-बूंद अनमोल- समझो इसका मोलÓ. भूगर्भ जल विभाग की ये चंद लाइनें मौजूदा समय में सार्थक नहीं हो पा रही हैं. जिले में 16 से 22 जुलाई तक भूजल सप्ताह मनाया जा रहा है. इसकी जिम्मेदारी जियोफिजिकल डिपार्टमेंट समेत अन्य विभागों के साथ आमजन की भी है. लेकिन जिम्मेदार ही मौजूदा समय में बेपरवाह बने हुए हैं. भूजल सप्ताह की रस्म अदायगी कर कागजों में किया जा रहा है. जिले में अंडरग्राउंड वाटर लेवल में इंप्रूव करने के उपायों पर रस्म अदायगी की जा रही है.

आगरा। भूजल सप्ताह के तहत चलाया जा रहा अभियान अफसरों के फोटो सेशन और रस्म अदायगी तक सिमटकर रह गया है। भूगर्भ जल विभाग के अजय राठौर ने बताया कि वाटर लेवल को बढ़ाने के लिए लोगों को जागरुक किया जा रहा है। कई स्थानों पर कार्यक्रम किए गए हैं।

कई स्थानों पर डीडब्ल्यूएलआर खराब
अंडरग्राउंड वाटर लेवल को रिकॉर्डिंग के लिए जिले में 48 स्थानों पर डीडब्ल्यूएलआर डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर लगाए गए हैं। कई स्थानों पर ये खराब पड़े हैं। ये रिकॉर्डर वल्र्ड बैंक के सहयोग से लगाए गए हैं। इसमें कमिश्नरी में रिकॉर्डर खराब पड़ा है। इसके अलावा डीडी टूरिज्म ऑफिस, कलालखेरिया आदि स्थानों पर खराब पड़े हैं। बता दें कि शहर में ऐसे कई स्थान हैं। जहां डिजिटल मीटर लगाए गए हैं। लेकिन उनके खराब होने से वाटर लेवल रिकॉर्ड नहीं हो रहा है। जिले में 71 पेजोमीटर हैं। इनसे भी वाटर लेवल रिकॉर्ड किया जाता है। बता दें कि डीडब्ल्यूएलआर जीपीएस सिस्टम से कार्य करते हैं। ये सेटेलाइट से अपडेट होते रहते हैं।

वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बदहाल
सरकारी विभागों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बदहाल पड़े हैं। नगर निगम में कहने को तो तीन चार स्थानों पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा होने का दावा अफसरों का है। लेकिन वे बदहाल है। कमोबेश यही स्थिति कलक्ट्रेट, एडीए, तहसील आदि स्थानों की है। इस बारे में नगर निगम के केयर टेकर सपन सिंह ने बताया कि जो हार्वेस्टिंग सिस्टम चोक हैं। उनकी सफाई की जाएगी।

10 ब्लॉक है डार्क जोन में
- आगरा सिटी
- अकोला
- बरौली अहीर
- बिचपुरी
- एत्मादपुर
- फतेहाबाद
-फतेहपुरसीकरी
- खंदौली
- सैंया
- शमशाबाद

ये हैं क्रिटीकल
- अछनेरा
-बाह

सेमी क्रिटीकल
- जगनेर
- जैतपुर कलां
- खेरागढ़
नोट: जिले के 15 ब्लॉक में मात्र पिनाहट ब्लॉक की सेफ जोन में हैं

ये हैं अंडरग्राउंड वाटर लेवल कम होने के कारण
- कुछ विभागों को छोड़कर ज्यादातर विभागों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित नहीं हैं
- तालाबों पर अतिक्रमण हो चुके हैं।
- ज्यादातर तालाब अपना अस्तित्व खो चुके हैं
- वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम न होने से बारिश का पानी व्यर्थ बह जाता है।
- बारिश का कम होना
- डे्रन सिस्टम में पॉलीथिन प्रदूषण के चलते जमीन पानी नहीं सोख पाती है।

अफसरों का दावा
जिले में अंडरग्राउंड वाटर लेवल बढ़ाने के कई उपाय किए गए हैं। इस बारे में सीडीओ ए। मनिकण्डन ने बताया कि वर्ष 2021-22 में 15 ब्लॉक में एक तरफ 2041 प्राइमरी और जूनियर स्कूलों में रुफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग का काम पूरा कराया गया है। इसके अलावा 603 तालाबों का जीर्णोद्धार कराया गया। 986 सोक पिट रिचार्ज पिट कार्य कराने का कार्य कराया गया।

जिले में तालाबों की स्थिति पर एक नजर
तहसील तालाबों की स्थिति
सदर 494
एत्मादपुर 576
किरावली 627
खेरागढ़ 555
फतेहाबाद 736
बाह 754

बॉक्स में
ज्यादातर तालाबों पर कब्जे
जिले में 3742 तालाब राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हैं। इसमें से कई तालाबों पर अवैध कब्जे हैं। जिले में 869.27 हेक्टेअर तालाबों का क्षेत्रफल है।

जिले में ऐसे गिर रहा वाटर लेवल
स्थान का नाम- प्री - पोस्ट मानूसन
जिला उद्योग केंद्र नुनिहाई 16.75 14.60 मीटर
बल्केश्वर - 22.24 21 मीटर
अछनेरा -7.15 7.10 मीटर
अछनेरा ब्यॉरा केंद्र - 7.15 6.27 मीटर

Posted By: Inextlive